मेरा कुछ सामान ...
एक पल तुम मिलें
एक पल जिंदगी...
एक पल तुम नहीं,
फिरभी एक पल यह जिंदगी..
एक जिंदगी गुजार दूं तुम्हारे होने की खुशीमें..
एक उम्र निकल जाये गम्-ए-इंतजार में..
खुशी ऐसी मिले के गम का एहसास ना हो..
गम ऐसा मिले के फिर कभी खुशी की तलाश ना हो..
एक जिंदगी अगर मिलें एक जिंदगी जितनी..
एक उम्र मुझें नसीब हो एक उम्र जितनी...
एक पल तुम मिलें
एक पल जिंदगी...
एक पल तुम नहीं,
फिरभी एक पल जिंदगी..
यह मिलने बिछडनें का सिलसिला टूंटता कहाँ है?
जिंदगी तो किश्तोंमें मिलती है...!!
7 Responses
  1. Abha M Says:

    जिंदगी तो किश्तों में मिलती है....


  2. Unsui Says:

    Good Poem.
    Thought of sharing something that has been making round on facebook, twitter and similar other forums.

    "A man asks Buddha "I want Happiness." Buddha says "Remove 'I', that's ego, then remove 'want', that's desire. Now u are left w/ Happiness."


  3. यह मिलने बिछडनें का सिलसिला टूंटता कहाँ है?
    जिंदगी तो किश्तोंमें मिलती है...!!

    Kyaa baat hai :)


  4. Abha, Thanks.. :-)

    Unsui,
    :-)

    सुप्रिया, धन्यवाद.. :-)


  5. are waa!!!
    ata hindi madhe hi?
    zakkkaas! :)

    ajun yeu de! bharpur shubhechchha! :)



  6. ani` Says:

    मोहतरमा, फिदा हैं हम आपकी इस नज़्म पे..
    इश्क़ जैसे यार से है वैसे ही जिंदगी से भी तो है मियां.. यारों से और जिंदगी से मिलने-बिछडने का ये सिलसिला.. उसमें फिर कहीं बेखुदी कि दुनियां.. कभी बेहोशी का आलम.. तो कभी गम कि फुरसत. और उसपर कभी इक खलिश भी तो रहती ही हैं आसपास. ये सिलसिला तो यूंही चलता रहेगा.. इसका कोई आगाज़ नहीं है और ना ही अंजाम, ये ना पाना है ना खोना और ना ही कोई मंजिल है इसकी.. ये तो इक मौज है जिसका कोई साहील नहीं है. और इसी रहगुजर को थोडा twist करके गुलजार-साहब-ने कुछ ऐसा भी फ़र्माया है कि..

    ना विसाल होयां कदीं, ना जुदाई होयीं,
    इश्क़ दे कैदी दीं.. ना रिहाई होयीं..

    अब चाहे मौज कहलो या कैद.. सिलसिला तो चलता ही रहेगा..